वो अजीज मेरे किस काम का है?

तुम्हें बताती हूँ अपनी तकलीफें खुदा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
खुद से खुद को बहलाती हूँ सदा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
गैरों के साथ बिताती हूँ वक़्त तो बता,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
झूठी तस्सल्ली दे करती हूँ दिल को रजा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
अगर गम ही है अंजाम-ए-वफ़ा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
उसके होने से भी जो ज़िन्दगी ग़मज़दा,
फिर वो अजीज किस काम का है?
मैं दर्द की मारी, हो गयी बेचारी, बता न खुदा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
पहना कर उल्फ़त का ताज़, कर दे बर्बाद,
फिर वो अजीज तो बस एक नाम का है।